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रानू बघेल– एडिटर, चिप बलरामपुर 🇮🇳

सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत अम्लभीठी में महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां बीते एक साल से आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी भवन के अभाव में एक निजी घर में संचालित किया जा रहा है। इस अस्थायी व्यवस्था के कारण बच्चों को न तो पर्याप्त स्थान मिल पा रहा है और न ही आवश्यक सुविधाएं।

बच्चों की सुविधा से ज्यादा अहम बनी विभागीय लापरवाही

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र एक संकीर्ण कमरे में चल रहा है, जहां बच्चों के लिए न खेल सामग्री है, न ही पोषण आहार की समुचित व्यवस्था। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम सुविधाएं केवल कागज़ों पर चल रही हैं। विभागीय अनदेखी का खामियाजा मासूम बच्चों को उठाना पड़ रहा है।

डबल इंजन सरकार में भी नहीं हो रही सुनवाई

प्रदेश में सरकार भले ही डबल इंजन की हो, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन इस समस्या पर आंख मूंदे बैठा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनपद पंचायत और स्थानीय अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जर्जर भवन में था केंद्र, निजी घर बना ठिकाना

ग्राम सरपंच से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बीते वर्ष पूरी तरह जर्जर हो गया था, जिसके चलते उसे अस्थायी रूप से एक ग्रामीण के निजी मकान में शिफ्ट कर दिया गया। जनपद पंचायत लखनपुर के सीईओ को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन फंड की कमी का हवाला देकर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं किया गया।

सिर्फ अम्लभीठी नहीं, कई पंचायतों में स्थिति बदहाल

अकेले अम्लभीठी ही नहीं, लखनपुर जनपद के कई अन्य पंचायतों में भी आंगनबाड़ी केंद्र या तो नहीं हैं या फिर जर्जर स्थिति में संचालित हो रहे हैं। बावजूद इसके, शासन-प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग की तरफ से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

पक्का आंगनबाड़ी भवन जल्द से जल्द बनाया जाए।

बच्चों को पोषण, खेल सामग्री और स्वास्थ्य सुविधा दी जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


अगर जल्द ही शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो ग्रामीण आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार कब तक चुप्पी तोड़ते हैं और मासूमों के लिए सुरक्षित और सुविधा युक्त आंगनबाड़ी की व्यवस्था करते हैं।

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