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छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रिपोर्ट संतोषी सिंह =बलरामपुर

प्रदेश की पहचान लंबे समय से धान के कटोरे के रूप में रही है, लेकिन हाल के दिनों में अलग-अलग जिलों से सामने आ रही घटनाओं ने इस छवि को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि दुर्ग जिले से शुरू हुई अफीम की अवैध खेती का सिलसिला अब उत्तर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले तक पहुंच गया है, जहां कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होने की बातें सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में ग्राम त्रिपुरी और उसके बाद ग्राम खजूरी के तुर्रिपानी क्षेत्र में अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं। इस सूचना के बाद कांग्रेस पार्टी की एक जांच टीम मौके पर पहुंची और खेतों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। टीम ने ग्रामीणों से चर्चा कर जानकारी जुटाई और पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

जांच दल के सदस्यों का कहना है कि क्षेत्र में अफीम की खेती कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह काफी समय से चल रही गतिविधि बताई जा रही है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते इस पर सख्ती से कार्रवाई की जाती, तो इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खेती संभव नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के कारण प्रदेश के युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेला जा रहा है, जो समाज और भविष्य दोनों के लिए चिंताजनक स्थिति है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश की पहचान कृषि प्रधान राज्य के रूप में है, जहां किसानों की मेहनत से धान की भरपूर पैदावार होती है। ऐसे में यदि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में नशीले पदार्थों की खेती सामने आती है, तो यह न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है।
इस पूरे मामले की जांच करने और स्थिति का आकलन करने के लिए पहुंचे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, पूर्व विधायक भानु प्रताप सिंह, केपी सिंह देव, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश मिश्रा, नगर पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र भगत, मंडल अध्यक्ष श्रवण गुप्ता, जिला महासचिव मुजस्सम नजर सहित कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। टीम ने मौके पर निरीक्षण कर प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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