शीतला माता मंदिर परिसर में महतारी सदन निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जिम्मेदारों को अवमानना नोटिस

रानू बघेल एडिटर – चीफ़ बलरामपुर
शीतला माता मंदिर परिसर में महतारी सदन निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जिम्मेदारों को अवमानना नोटिस
रायपुर/तिल्दा: राजधानी के तिल्दा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सरोरा स्थित शीतला माता मंदिर प्रांगण में विवादास्पद तरीके से हो रहे महतारी सदन निर्माण कार्य पर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही, न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने के मामले में रायपुर जिले के कुछ अधिकारियों सहित ग्राम पंचायत सरोरा की वर्तमान सरपंच को अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही राज्य के मंत्री टंकराम वर्मा द्वारा सरोरा गांव के खसरा नंबर 1317/4 पर महतारी सदन भवन निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। हालांकि, बाद में भवन का स्थान बदले जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि यह बदलाव जानबूझकर और द्वेष भावना से किया गया, जिससे शंकराचार्य मंच के सामने भवन निर्माण कर शंकराचार्य के अनुयायियों को नीचा दिखाया जा सके।
यह कार्य तत्कालीन सरपंच बिहारी राम वर्मा और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के उप अभियंता कमलेश चंद्राकर के माध्यम से लेआउट तैयार कर प्रारंभ कराया गया, जिस पर मां शीतला समिति व स्थानीय श्रद्धालुओं ने विरोध जताया। इस मामले को लेकर मंत्री टंकराम वर्मा और एसडीएम आशुतोष देवांगन से भी आग्रह किया गया था कि निर्माण उसी स्थल पर हो जहां शिलान्यास हुआ था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर अंततः समिति ने उच्च न्यायालय की शरण ली।

इस अवमानना को लेकर शीतला समिति ने फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने निर्माण पर तत्काल रोक लगाने का आदेश पारित किया और आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इस फैसले से मां शीतला समिति और शंकराचार्य के अनुयायियों में खासा उत्साह है। समिति ने इसे न्याय की जीत करार दिया है। मामले में समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत गुप्ता और अनिल त्रिपाठी ने पैरवी की। जानकारी मां शीतला समिति के उप संरक्षक दाऊ डी. डो. अग्रवाल द्वारा साझा की गई।
