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सरगुजा पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप, लखनपुर थाना की कार्यप्रणाली कटघरे में


अंबिकापुर/लखनपुर (सरगुजा)।
सरगुजा जिले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखनपुर थाना से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद पुलिस की निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों एवं आम नागरिकों का आरोप है कि थाना पुलिस मनमानी करते हुए खुद को कानून से ऊपर समझ रही है।
आरोप है कि लखनपुर थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा आम जनता एवं जनप्रतिनिधियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। पुलिस पर यह भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पैसा लेकर झूठी FIR दर्ज की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में हेड कांस्टेबल रवि एवं थाना प्रभारी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
पत्रकार के मामले में काउंटर केस दर्ज नहीं
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि एक पत्रकार के साथ हुए विवाद में आज तक काउंटर केस दर्ज नहीं किया गया, जबकि पत्रकार द्वारा आवेदन एवं तथ्यों के साथ शिकायत दी गई थी। आरोप है कि संबंधित ASI एवं थाना प्रभारी की अपराधियों से मिलीभगत के चलते जानबूझकर काउंटर केस दर्ज नहीं किया गया, जबकि पत्रकार को ही झूठे मामले में फँसाने की कोशिश की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
इतना ही नहीं, आरोप है कि संबंधित ASI द्वारा मोबाइल फोन पर ऐसी जानकारी दी गई जिसकी रिकॉर्डिंग अहम सबूत है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। कानूनन किसी भी प्रकरण की जानकारी इस प्रकार देना न केवल अनुचित है, बल्कि नियमों के खिलाफ भी माना जाता है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी एसपी सरगुजा, कलेक्टर सरगुजा एवं मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन तक पहुँचाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इस चुप्पी ने लोगों में रोष और असंतोष पैदा कर दिया है।

लोगों का कहना है कि आज जब एक पत्रकार को झूठे प्रकरण में फँसाया जा रहा है, तो यह सोचने वाली बात है कि आम जनता के साथ पुलिस किस तरह का व्यवहार करती होगी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस के प्रति जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
जनप्रतिनिधियों, पत्रकार संगठनों एवं नागरिकों ने सरगुजा कलेक्टर से पूरे मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेने की मांग की है। साथ ही मांग की जा रही है कि
लखनपुर थाना के दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए,
पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
झूठी FIR को निरस्त किया जाए,
और पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, या फिर लखनपुर थाना की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल यूँ ही अनसुने रह जाएंगे।

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