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वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चूक, खुले में फेंकी गईं इंजेक्शन व दवाइयाँ

संतोषी सिंह की रिपोर्ट=
वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में मौजूद कबाड़ क्षेत्र में भारी मात्रा में इंजेक्शन, टेबलेट, शीशियाँ और अन्य चिकित्सकीय दवाइयाँ खुले में पड़ी मिलीं, जिससे न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कबाड़ में पड़ी कई दवाइयाँ एक्सपायरी हो चुकी हैं, जिन्हें नियमानुसार समय पर नष्ट किया जाना था। इसके बावजूद इन्हें बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खुले स्थान पर फेंक दिया गया। यह स्थिति बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का सीधा उल्लंघन मानी जा रही है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस स्थान पर ये दवाइयाँ पड़ी हैं, वहां आम लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में बच्चों, कबाड़ बीनने वालों या असामाजिक तत्वों द्वारा इन दवाइयों के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इंजेक्शन और दवाइयों का गलत हाथों में जाना जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। यदि समय रहते इन दवाइयों का सुरक्षित निपटान किया गया होता, तो यह खतरा पैदा ही नहीं होता। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में ऐसी लापरवाही अक्षम्य है।
मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की कमी के कारण ही यह स्थिति सामने आई है, ऐसा आमजन का मानना है।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल यह घटना वाड्रफनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर करती नजर आ रही है।

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