पुणे में जीआईबीएफ ने किया भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन का भव्य आयोजन

पुणे।
भारत और अफ्रीका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फ़ोरम (जीआईबीएफ) ने भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन का तीसरा संस्करण पुणे के ग्रैंड हेरिटेज रिसॉर्ट्स में भव्य तरीके से आयोजित किया।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 800 से अधिक भारतीय कंपनियों और 100 से अधिक अफ्रीकी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन ने दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग, निवेश और साझेदारी के नए अवसर खोले।
मुख्य अतिथि
सम्मेलन की मुख्य अतिथि डॉ. कांगो की शिक्षा मंत्री महामहिम जीनोट कैन्ट लारोज़ रहीं।
एमओयू से नए अवसर
कार्यक्रम में भारतीय और अफ्रीकी कंपनियों के बीच कई अहम एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन हुए। इनमें कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनन, सौर ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर समझौते शामिल रहे। इन एमओयू से आने वाले समय में कई भारतीय कंपनियाँ अफ्रीका में कार्य कर सकती हैं और अफ्रीकी उद्यमियों को भारत में निवेश का अवसर मिलेगा।
सरकार और जीआईबीएफ की भूमिका
महाराष्ट्र सरकार ने सम्मेलन का स्वागत करते हुए कहा कि जीआईबीएफ भारतीय एसएमई उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का काम कर रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए लोकल से ग्लोबल बिज़नेस के सपने को साकार करने में भी जीआईबीएफ अहम भूमिका निभा रहा है।
जीआईबीएफ के पदाधिकारियों के विचार
जीआईबीएफ के प्रेसिडेंट डॉ. जितेंद्र जोशी ने कहा—
“यह सम्मेलन भारत-अफ्रीका के बीच अवसरों का एक मजबूत पुल है, जो दोनों क्षेत्रों के लिए लाभकारी होगा।”
जीआईबीएफ की सेक्रेटरी जनरल दीपाली गडकरी ने सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन दोनों क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।
25 अफ्रीकी देशों की भागीदारी
सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, नाइजीरिया, इथियोपिया, केन्या, नामीबिया, बोत्सवाना, कैमरून, कांगो, डॉ. कांगो, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, नाइजर, घाना, मिस्र, जाम्बिया, तंजानिया, युगांडा, रवांडा सहित 25 अफ्रीकी देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों ने अपने-अपने देशों में व्यापार और निवेश के अवसरों को प्रस्तुत किया।
निष्कर्ष
भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन ने दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दी है। इससे न केवल व्यापार बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी और मजबूत होंगे।
