अनूपपुर में कलमकारों की ऐतिहासिक एकता – संघर्ष के आगे झुका प्रशासन, सभी मांगों पर चर्चा का मिला भरोसा


मो.कौशल सिद्दीक़ी _ बलरामपुर रामानुंजगंज
अनूपपुर की धरती शनिवार को पत्रकारों की एकजुटता और आवाज़ से गूंज उठी। “अनूपपुर पत्रकार एकता मंच” के बैनर तले सैकड़ों पत्रकारों ने उत्पीड़न, फर्जी मुकदमों और उपेक्षा के विरोध में सड़कों पर उतरकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।
न्यू बस स्टैंड अंडरब्रिज के समीप चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन ने आखिरकार प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। अधिकारियों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर पत्रकारों की सभी मांगों पर चर्चा और समाधान का आश्वासन दिया।
🔥 सड़क पर उतरी कलम की ताकत
8 नवंबर को जिलेभर से पत्रकार एकत्र हुए। चिलचिलाती धूप में भी वे डटे रहे और नारे गूंजे—
“हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं, सच्चाई लिखते रहेंगे!”
यह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की लड़ाई बन गया। पत्रकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनकी आवाज़ दबाई नहीं जा सकेगी।
🤝 सीमाओं से परे मिला समर्थन
इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ से भी व्यापक समर्थन मिला। वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र जायसवाल, कर्मुनिशा और आदित्य गुप्ता ने मंच से कहा—
“यह संघर्ष सिर्फ अनूपपुर का नहीं, बल्कि पूरे देश के पत्रकारों की आवाज़ है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले लेगा।”
उनके वक्तव्यों ने आंदोलन में नई ऊर्जा और जोश भर दिया।
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पत्रकारों के इस संघर्ष को सियासी दलों ने भी समर्थन दिया।
कांग्रेस के जीवेंद्र सिंह, राजीव सिंह, बाबा खान, सतेंद्र दुबे, और भाजपा के राज तिवारी व रामलाल रौतेल (अध्यक्ष, कोल विकास प्राधिकरण) ने मंच साझा करते हुए कहा—
“पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ हैं, उनके साथ अन्याय अस्वीकार्य है।”
दोनों दलों ने भरोसा दिलाया कि पत्रकारों की मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी।
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यह संघर्ष साबित करता है कि जब कलम एकजुट होती है, तो सत्ता को भी जवाब देना पड़ता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है —
क्योंकि अनूपपुर की कलम अब खामोश नहीं, जाग चुकी है और यह जागरण लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक बन चुका है।
