ईमानदार पत्रकार पर झूठे आरोपों की साज़िश नाकाम : लैलूंगा में असामाजिक तत्वों की करतूत आई सामने

रायगढ़, लैलूंगा -निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता की पहचान बन चुके वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल को बदनाम करने की गहरी साजिश का खुलासा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ शरारती और आपराधिक मानसिकता वाले लोगों ने लैलूंगा थाना में उनके खिलाफ एक झूठी और आधारहीन शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
शिकायत में न केवल मनगढ़ंत आरोप लगाए गए, बल्कि भाषा भी अपमानजनक और आपत्तिजनक रही। यह संदेह से परे है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उन लोगों का हाथ है, जिनकी खुद की पृष्ठभूमि अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़ी रही है।
षड्यंत्र के पीछे कौन?
इस मामले में सबसे प्रमुख नाम सामने आया है राजेश कुमार शर्मा उर्फ “रेगड़ी वाला” का, जो पूर्व में कई गंभीर अपराधों—जैसे लूट और मारपीट—में संलिप्त रहा है और वर्तमान में जमानत पर है। ऐसे व्यक्ति की ओर से की गई कोई भी शिकायत संदेहास्पद ही मानी जाएगी।
साथ ही, पटवारी संजय भगत पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि वह शराब सेवन और रिश्वतखोरी में लिप्त रहता है और आमजन को धमकाकर काम करता है। इन दोनों के गठजोड़ और जायसवाल द्वारा उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित करने की वजह से यह बदले की भावना प्रतीत होती है।
सामाजिक विरोध और एकजुटता
इस घटना के बाद लैलूंगा के नागरिकों और पत्रकार संघों में गहरा आक्रोश है। सभी का कहना है कि चंद्रशेखर जायसवाल ने सदैव जनता के पक्ष में बोलने का कार्य किया है—चाहे वह प्रशासनिक भ्रष्टाचार हो, अपराधियों का जाल, या फिर आम जनता के अधिकार।
लोगों की मांग है कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और जिन्होंने झूठा आवेदन दिया है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए। अगर प्रशासन मौन रहता है, तो जनांदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला
यह मसला केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल अधिकारों पर चोट है। ऐसे हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं और उन आवाज़ों को दबाने की कोशिश हैं जो जनता की भलाई के लिए बोलती हैं।
यदि अब भी प्रशासन ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो न केवल पत्रकार समाज बल्कि आमजन भी इस चुप्पी को स्वीकार नहीं करेगा।
