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शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई



वन नेशन–वन राशन कार्ड जैसी महत्वपूर्ण योजना के बावजूद लाभार्थियों को गुणवत्ता युक्त चावल नहीं मिल रहा


तिल्दा-नेवरा। शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। वन नेशन–वन राशन कार्ड जैसी महत्वपूर्ण योजना के बावजूद लाभार्थियों को गुणवत्ता युक्त चावल नहीं मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कई हितग्राहियों ने शिकायत की है कि दुकान संचालक खराब और कीड़ों वाला चावल बांट रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने फोटो भी उपलब्ध कराए हैं, जिनमें चावल की गुणवत्ता स्पष्ट रूप से बेहद खराब नजर आ रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन नेशन–वन राशन कार्ड’ का उद्देश्य

1. राशनकार्डधारी को अपने निवास स्थान के निकटतम दुकान से राशन प्राप्त करने की सुविधा देना।


2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अन्त्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को लाभ पहुंचाना।


3. अन्य राज्यों या प्रदेश के भीतर अस्थायी प्रवास में भी आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से राशन उपलब्ध कराना।


4. आधार लिंकिंग अनिवार्य, जिससे पारदर्शिता और सही हितग्राही तक सामग्री की पहुँच सुनिश्चित हो सके।



लेकिन इसके बावजूद तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में हितग्राहियों को नजदीकी दुकानों से चावल नहीं दिया जा रहा है। संचालक का कहना है कि “सूची में जिनका नाम है, केवल उन्हें ही दिया जाएगा”—जबकि योजना स्पष्ट रूप से किसी भी उचित मूल्य दुकान से आधार प्रमाणीकरण द्वारा राशन उठाने की सुविधा देती है।

हितग्राहियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “दुकान में जो चावल दिया जा रहा है, वह अत्यंत घटिया गुणवत्ता का है, उसमें कीड़े और गंदगी मिले हुए हैं। ऐसे चावल को खाने योग्य कहना भी मुश्किल है।”
प्राप्त तस्वीरों में चावल के साथ काले कीड़े और गंदगी साफ दिख रही है, जो खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन है।

स्थानीय लोगों ने जिला खाद्य विभाग से तत्काल जांच कर संचालक पर कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि उचित मूल्य दुकानें इसी प्रकार मिलावटी व खराब सामग्री देती रहीं, तो सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।

जनता की मांग है कि दोषी संचालक के खिलाफ कार्रवाई कर हितग्राहियों को स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण चावल तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

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