परिवारवाद और गरीब उम्मीदवार होने से संतोषी सिंह का टिकट किया गया रद।

रानू – बघेल, बलरामपुर । बलरामपुर वार्ड क्रमांक 15 सीट पर हाल में एक विवादस्पद घटना ने लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वार्ड चुनाव में कांग्रेस ने प्रारंभ में समाज के वंचित तबके से आने वाली संतोषी सिंह के नाम पर मोहर लगाई थी, फिर अचानक से कांग्रेस पार्टी और स्थानीय समाज के अमीर नेताओं के दबाव में गरीब पृष्ठभूमि की उम्मीदवार संतोषी सिंह को चुनावी तारीखों के नजदीक आते ही अचानक पार्टी ने उनका नाम वापस लेकर टिकट रद्द कर दिया, बलरामपुर की यह घटना एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है, क्या हमारे लोकतंत्र में गरीबों की आवाज सचमुच सुनी जाती है…? अगर राजनीतिक दल वंचित वर्गों के उम्मीदवारों को केवल दिखावे के लिए उतारेंगे और पद छीन लेंगे तो यह लोकतंत्र की भावना के विपरीत है संतोषी सिंह ने इस फैसले को “लोकतंत्र के साथ धोखा” बताया है उनके समर्थकों का यह कहना है कि वह अब निर्दलीय चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है लेकिन बिना पार्टी मशीनरी और फंडिंग के यह लड़ाई और भी मुश्किल होगी।

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