पोलियो से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, हर बच्चे को पिलाएं ‘दो बूंद जिंदगी की।

पोलियो जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है और कई मामलों में स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती है।
भारत को पोलियो मुक्त घोषित किए हुए कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो के मामले सामने आने के कारण सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर पल्स पोलियो अभियान चलाया जाता है, जिसमें 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलवाएं। विभाग का कहना है कि नियमित टीकाकरण के साथ-साथ पल्स पोलियो अभियान में भाग लेना भी बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी बच्चा इस बीमारी के खतरे से वंचित न रह जाए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिला रहे हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश:
“हर बच्चे तक पोलियो की दवा पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। आइए संकल्प लें कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
“पोलियो एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज नहीं, बल्कि केवल बचाव संभव है। इसलिए अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को समय पर पोलियो की खुराक अवश्य दिलवाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी
